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kya 138 se pahle 420 ki shikayat ki ja sakti hai

रश्मि टंडन बनाम कर्नाटक राज्य "रश्मि टंडन एवं अन्य बनाम कर्नाटक राज्य" (Rashmi Tandon & Ors. vs State of Karnataka) केस स्टडी मूल तथ्य: इस मामले में शिकायतकर्ता ने कंपनी और उसके निदेशकों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत निजी परिवाद (private complaint) दर्ज कराया था 1 । इससे पूर्व, कंपनी के खिलाफ नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 (चेक बाउंस) के तहत भी कार्यवाही शुरू की गई थी 3 । मुख्य मुद्दा: क्या धारा 138 NI Act के तहत कार्यवाही शुरू होने के बाद, उसी घटना से संबंधित धारा 420 IPC के तहत भी मुकदमा चलाया जा सकता है? अदालत का निर्णय: कर्नाटक हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि धारा 420 IPC के तहत शिकायत, धारा 138 NI Act के तहत कार्यवाही शुरू होने के बाद भी मान्य (maintainable) है 3 । दोनों अपराधों के तत्व अलग-अलग हैं: धारा 138 NI Act में केवल चेक बाउंस और वैध देनदारी की बात होती है। धारा 420 IPC में धोखाधड़ी की नीयत (dishonest intention) का होना आवश्यक है। सुप्रीम कोर्ट ने भी स्पष्ट किया है कि दोनों धाराओं में कार्यवाही एक साथ चल सकती है, क्योंकि वे एक-...